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प्रेम की एक कविता

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प्यार को पहचानने के नाम अनेक,  इश्क़, प्यार, मोहब्बत या प्रेम, सुकून सब ही में एक || दर्द का दरिया उतना ही गहरा ,  जितने आसमान में तारे अनेक || अनेको रंगो से भरा समुंदर प्रेम का, छूते ही सफेद हो रंग जिसका || लाल रंग से गहरा नाता इसका, खून की तरह नसो में चड़ता, दिल में रहना पर ख़यालो में घूमना, एक घर तो दूसरा बगीचा इसका||  खुशी जो मिली इसके संग ,  तब समझ आए ज़िन्दगी के काफी रंग।  साथ ने उनके साथ निभाना सिखाया,  तो दूरी ने उनकी इज्ज़त करना सिखाया।  मोहब्बत तो तब भी हुई ना कम,  इसका सबूत बस दे सकती बिताए खुशी के वो पल|| माफ़ करिएगा दिल से कहते है, इस कविता के चाहे अल्फ़ाज़ आम हो सकते, कहने का अंदाज़ नसाज़ हो सके, पर दिल से पूछिएगा प्यार से तो  लबो पे बस नाम ला सकेगा वो बस एक|| मोहब्बत का जाम हो कैसा, चाहे मीठा या कड़वा, रोक ना पाओगे चखते ही एक अकेला|| इश्क़ की मिठास चलिए उन्हें मुबारक, कड़वे इश्क़ में भी इश्क़ का रंग ऐसा, जो दिल से छूटा ना सकेगा प्यार उनका|| दीपिका 😀❤️ Instagram : deepikaselflove 

साइकिल पे आया सपने वाला

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साइकिल पे आया एक भईया, जिसने पहना सफेद धोती और कुर्ता, पगड़ी उसकी कभी लाल कभी नीली, हर दिन रंग बदलती सपने बेचता रंग बिरंगे; इंद्रधनुषी, गुलाबी गुब्बारों मे आवाज़ लगाता "सपने ले लो सपने..... नेया" बच्चे बड़े सब बाहर आ जाते, गोला बना उसको पूछते , कितने में है ये सपने? वो कहता ,"पहले सपने तो बताओ फिर दाम भी बता दूंगा, अगर हुआ तो मुफ्त भी कर दूंगा!!" बच्चे बड़े सब खुश हो जाते। फिर बच्चे बोलते, मुझे चाहिए एक सपना जिसमे दोस्तो संग में खेलूं दिन रात क्रिकेट अपना, फिर भी मम्मी से मिले प्यार ओर पापा से ना पड़े मार फिर दूसरा बोला, मुझे चाहिए एक सपना जिसमे मेरे पास हो बहुत सारा खिलौना, नाचता बंदर, तेज चलती कार, गुड़िया हो बेशुमार, फिर बड़े बोले मुझे चाहिए एक सपना जिसमे मै जाऊं वादिओं के पार, घर हो वहां मेरा, ना गाड़ियों का हो शोर ना हो काम मेरा, बैठे चुस्की लूँ चाय की और सो जाऊँ बेशुमार। किसी ने कहा जाना डिजनीलैंड,  किसी कहा जाना चांद के पार ।  गुब्बारे वाला बोला," हाँ हाँ! ले लो सपना कैसा - जैसा भी, सपने ही तो देने आया।", "एक दिन जी सकोगे सपना अप...